पढ़िए एक ऐसे देश के बारे में जिसका धर्म इस्लाम है पर रामायण उसकी संस्कृति में बसा हैं

 

इंडोनेशिया में रामलीला का मंचन करते कलाकार

इंडोनेशिया ऐसा देश हैं जिसका धर्म तो इस्लाम है पर रामायण उसकी संस्कृति है, इंडोनेशिया जैसे देश के बारे में जानना और पढ़ना तब ज्यादा जरूरी हो जाता हैं जब देश में हिंदुत्व के प्रति कुछ लोग घृणा का माहौल तैयार करने में लगे हुए हो और यहाँ की बहुरंगी संस्कृति को बाँटने के लिए कमर कस चुके हो।

इंडोनेशिया आबादी के लिहाज से मुस्लिमों की सबसे बड़ी आबादी वाला देश हैं। इंडोनेशिया की जनसंख्या 25.5 करोड़ से ज़्यादा है और ये दुनिया की चौथी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है इसमें 87.5 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिम है और 3 प्रतिशत हिंदू हैं। इंडोनेशिया का प्राचीन भारत से भी संबंध रहा है। आज भी यहां के त्योहारों में भारतीयता की झलक दिखाई पड़ती है। यहां प्राचीन हिंदू मंदिर भी हैं जो इस बात की गवाही देते हैं। इस देश में बड़ी संख्या में भारतीय बसते हैं।





बुनी अथवा मुनि सभ्यता इंडोनेशिया की सबसे पुरानी सभ्यता है। चौथी शताब्दी ईसा पूर्व तक ये सभ्यता काफी उन्नति कर चुकी थी। ये लोग हिंदू धर्म मानते थे और ऋषि परम्परा का अनुकरण करते थे। अगले दो हजार साल तक इंडोनेशिया एक हिन्दू और बौद्ध देशों का समूह रहा।किर्तानेगारा और त्रिभुवना जैसे राजा यहां सदियों पहले राज करते थे। यहाँ के स्थानीय शासकों ने धीरे-धीरे भारतीय सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक प्रारुप को अपनाया हुआ था। इंडोनेशिया का इतिहास विदेशियों से प्रभावित रहा है, जो क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों की वजह से खींचे चले आए। मुस्लिम व्यापारी अपने साथ यहाँ इस्लाम लाए, जिसके कारण यहाँ की पारंपरिक हिन्दू और बौद्ध संस्कृति को हानि हुई परन्तु इंडोनेशिया के लोग आज भले ही इस्लाम को मानते हों किन्तु यहाँ आज भी हिंदुत्व खत्म नही हुआ है यहाँ पर लोगों और स्थानों के नाम आज भी संस्कृत में रखे जाते हैं यहाँ आज भी रामायण पढ़ी व पढाई जाती है।

यहाँ हिंदू और मुस्लिम के बीच कोई फर्क नहीं किया जाता हैं। इंडोनेशियाई 20,000 का नोट का इस बात का उदाहरण हैं की कैसे इन्होंने हिंदुत्व को सहेज कर रखा हुआ हैं। इस नोट पर हजर देवान्तर के साथ भगवान गणेश की भी तस्वीर छपी है। इस नोट के पीछे के हिस्से पर बच्चों से भरी कक्षा की तस्वीर है। कहा जाता हैं कि 1997 में कई एशियाई देशों की मुद्रा का अवमूल्यन हो रहा था। जब अवमूल्यन को रोकने के सभी प्रयास विफल रहे तो किसी ने सुझाव दिया कि अच्छे भाग्य के लिए गणेश की छवि नोट पर लगाएं। सौभाग्य से, यह काम किया गया और यह अंधविश्वास तभी से प्रथा में है। तभी से गणेश की छवि नोट पर छापी जाने लगी है और वहां के मूल निवासियों ने इसे स्वीकार कर लिया है। यहाँ भगवान गणेश को कला, शास्त्र और बुद्धि का भगवान माना जाता है। ऐसे ही की हजर देवान्तर का इंडोनेशिया के स्वतंत्रता में अहम हिस्सा था और वो पढ़ाई के लिए जागरुकता फैलाने में तत्पर आगे रहते थे। नोट के पीछे बनी कक्षा की तस्वीर नोट की थीम शिक्षा को दर्शाती है।

इंडोनेशिया की यह 50 हजार की नोट देखिये इस पर 17वीं शताब्दी में बना उलून दानु मन्दिर की तस्वीर अंकित है, यह मंदिर त्रिदेव ब्रह्मा विष्णु महेश का हैं।

देश की राजधानी जकार्ता स्क्वेर में महाभारत युद्ध को दर्शाती कृष्णा-अर्जुन के पुतले भी लगे हैं। इंडोनेशिया की सेना भी अपना रक्षक हिंदू भगवान हनुमान को मानते हैं। बाली टूरिज्म का लोगो (Logo) भी हिंदु शास्त्रों में से ही लिया गया है। वहाँ के एक कॉलेज के लोगो(Logo) पर भी भगवान गणेश हैं।

दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला यह देश में रामलीला का मंचन होता हैं और इंडोनेशिया रामायण के साथ जुड़ी अपनी इस सांस्कृतिक पहचान के साथ बहुत ही सहज है। रामायण को वहां रामायण ककविन (काव्य) कहा जाता है। 2015 में जब इंडोनेशिया के शिक्षा और संस्कृति मंत्री अनीस बास्वेदन भारत आए थे तब इस यात्रा के दौरान उनके एक बयान ने खास तौर पर सुर्खियां बटोरीं। अनीस का कहना था, ‘हमारी रामायण दुनिया भर में मशहूर है. हम चाहते हैं कि इसका मंचन करने वाले हमारे कलाकार भारत के अलग-अलग शहरों में साल में कम से कम दो बार अपनी कला का प्रदर्शन करें, हम तो भारत में नियमित रूप से रामायण पर्व का आयोजन भी करना चाहेंगे।’

इतिहास बताता है कि रामायण का इंडोनेशियाई संस्करण सातवीं सदी के दौरान मध्य जावा में लिखा गया था। तब यहां मेदांग राजवंश का शासन था। लेकिन रामायण के इंडोनेशिया आने से बहुत पहले रामायण में इंडोनेशिया आ चुका था। ईसा से कई सदी पहले लिखी गई वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड में वर्णन है कि कपिराज सुग्रीव ने सीता की खोज में पूर्व की तरफ रवाना हुए दूतों को यवद्वीप और सुवर्ण द्वीप जाने का भी आदेश दिया था. कई इतिहासकारों के मुताबिक यही आज के जावा और सुमात्रा हैं।

इंडोनेशिया के बाजारों में भगवान राम सीता के इस तरह के पुतले मिलते हैं।

एक हिन्दू मित्र जब इंडोनेशिया पहली बार गए तो वह वहाँ बिनतान आइलैंड तनजुंग पिनाग शहर में रामायण मॉल देखकर आश्चर्यचकित रह गए, जब उन्होंने लोगो से पुछा तो उन्होंने बोला की यहां करीब करीब हर आइलैंड पर आपको रामायण मॉल और शॉपिंग स्टोर मिलेंगे। उनकी ऑफिस में एक कपल था इंडोनेशिया से, लड़का हिन्दू लड़की मुस्लिम और लड़की का नाम सरस्वती था। जब उन्होंने पूछा तो वो बोले की हमारे यहां रिलिजन अलग है मान्यता एक ही है, यहाँ तक कि दोनों को संस्कृत श्लोक याद थे। ऐसा कपल तो आप यहाँ भारत मे सोच भी नही सकते दिल्ली का अंकित हत्याकांड आंखों के सामने तैर जाता हैं।

यहाँ रामायण और सरस्वती के नाम पर बहुत से मॉल हैं यहाँ का एयरपोर्ट और एयर लाइन दोनो गरुण के नाम पर हैं।

इंडोनेशिया की संस्कृति से हम सभी को सीखने की जरूरत हैं कि धर्म बस इंसान की कई पहचानों में से एक पहचान है पर राष्ट्र की पहचान उसकी मूल संस्कृति हैं, इससे भटक कर कोई राष्ट्र सम्पूर्ण नही बन सकता हैं।





Images crtsy : Google, Twitter

यह पोस्ट आपको कैसी लगी नीचे कमेंट में जरूर बताये, और इस पोस्ट को सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जरूर शेयर करे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *