रोहित सरदाना का ‘मियां’ बोलना आरफा खानम को नहीं आया रास, अपशब्द बोलने पर हुईं ट्रोल

वर्तमान समय में देश में राजनीतिक पार्टियों के नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए अब प्रभु हनुमान जी को भी सियासत में घसीट लाएं हैं। कोई हनुमान जी को मुसलमान, कोई जाट, कोई ब्राह्मण, कोई आदिवासी, कोई गोंड़ आदि कह रहा है। मतलब सियासत के स्तर को एकदम निचले स्तर तक गिरा दिया गया है।

इसी बीच आजतक के वरिष्ठ एवं तेजतर्रार पत्रकार रोहित सरदाना ने इन नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, “ये तो शुक्र है हनुमान जी आजकल इधर मिलते नहीं किसी को। वरना अपने लोग उन्हीं से पूछ डालते –  प्रभु, कौन जात हो?”

इसके बाद सरदाना ने लोकसभा टीवी के पत्रकार अनुराग पुनेथा के ट्वीट कि हवाला देते हुए लिखा, “हनुमान जी पर बस Marvel वालों का दावा आना बाक़ी है, कि हनुमान जी पहले Avenger थे! HeMan, Superman, SpiderMan से पहले हिंदुस्तान के बच्चे HanuMan को जानते हैं!”

सरदाना के इस ट्वीट पर असद हुसैन नाम के ट्रोलर ने अपनी बीमार मानसिकता दिखाते हुए लिखा, “शुक्र मनाइए, इसी सब के बहाने आपको रोज 5 बजे कॉमेडी सर्कस होस्ट करने का मौका मिल जाता है। वो अलग बात है उसमे आपका परफॉर्मेंस सबसे अच्छा होता है।” इसके बाद सरदाना ने इस ट्रोलर को जवाब देते हुए लिखा, “ग़लत चैनल देख रहे मियाँ! अपने भगवान की जाति पर हमें बहस करने की आवश्यकता नहीं है। बाक़ी भावनाओं को कंट्रोल में रखो, हमारी भावनाएँ ना भड़काओ, कुछ लिख देंगे तो आपके बहुत साथियों की भावनाएँ आहत हो जाएँगी!”

रोहित सरदाना के इस जवाब के बाद एनडीटीवी और राज्यसभा टीवी की पूर्व एवं द वायर की वर्तमान पत्रकार आरफा खानम शेरवानी भड़क उठीं। सरदाना का अपने ट्वीट में ‘मियाँ’ कहना, आरफा को रास नहीं आया। इसके बाद आरफा ने सरदाना के ट्वीट का हवाला देते हुए लिखा, “देश के सबसे तेज़ चैनल के ये एंकर महोदय अपने मुस्लिम दर्शक को मियाँ बुलाते हैं, धमकाते भी हैं…
सिर्फ़ घटिया सियासत ही नहीं, गटर-स्तर पत्रकारिता के लिये भी ये दौर याद रखा जायेगा।”

हालांकि वही रोहित सरदना सिर्फ सच बात कहने के लिए जाने जाते हैं, बुलंदशहर हिंसा में उन्होंने हिन्दू संगठनो और बीजेपी दोनो को लताड़ लगाई थी, देखें उनकी यह ट्वीट।

अब देखिए इन्हें एक ट्रोल को ‘मियाँ’ कहना इन्हें बुरा लग गया। जबकि इस्लामिक सभ्यता में किसी को ‘मियां’ कहकर बुलाना सम्मान का प्रतीक है।

बहरहाल हम तो यही कहेंगे, आरफा जी आपको शर्म करनी चाहिए, आप एक पत्रकार है और कोई दूसरा पत्रकार अगर आपकी विचारधारा से इत्तेफाक नहीं रखता तो आप उसको गटर लेवल पत्रकार बोल देंगी। ये आंकलन है आपका !

गौरतलब है, आरफा खानम अधिकतर हिन्दू विरोधी एजेंडे को आगे बढाने के लिए जानी जाती हैं। सिर्फ हिंदू विरोधी ही नहीं, अगर इन्हें पाकिस्तान की वाहवाही लूटने का मौका मिले तो भी ये पाकिस्तान का महिमामंडन करने में पीछे नहीं हटेंगी।

जर्मनी में मिले फेलोशिप का शुक्रिया अदा हिंदू विरोधी लेख लिखकर किया

‘द वायर’ में कार्यरत महिला पत्रकार आरफा शेरवानी ने जर्मनी में मिले फेलोशिप का शुक्रिया देश के हिंदुओं के खिलाफ लेख लिखकर अदा किया। इसने जर्मनी की एक वेबसाइट के लिए अपने आलेख में लिखा कि किस प्रकार बगैर ऐतिहाक तथ्य के सरकार या भाजपा द्वारा भुगतान किए जाने वाले हिंदू उनलोगों को ट्रोल करते हैं, जो सरकार के खिलाफ लिखते हैं। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर हिंदुत्व और उसमें भी अगड़ी जातियों की सर्वोच्चता स्थापित करने के प्रयास का आरोप लगाया। उन्होंने अपने आलेख में मुसलमानों को उपेक्षित और प्रताड़ित करने की बात कही। इसके अलावा उन्होंने गौरी लंकेश की हत्या करने में अतिवादी हिंदुओं का हाथ होने की बात कही है। शेरवानी ने जितनी भी बातें लिखी उसका न तो कोई साक्ष्य दिया है ना ही ठोस तर्क।

सिर्फ एक धर्म विशेष ही नहीं, एक जाति विशेष के खिलाफ भी अपना एजेंडा चलाने वाली आरफा ने पत्रकारों को भी अगड़े और पिछड़े में बांट दिता है। मतलब जो पत्रकार दिन-रात इनके मुताबिक चलता है, वही पत्रकार है, बाकियों को ये पत्रकार नहीं मानतीं।

फर्जी खबरें चलाने में हासिल है महारथ

आरफा खानम शेरवानी की पत्रकारिता का स्तर ये है कि आजकल ये मोदी विरोध के नाम पर देशविरोधी पत्रकारिता करने से भी पीछे नहीं हटतीं। इनका एक ही एजेंडा है- फेक न्यूज़ फैक्ट्री। यह पत्रकार अपने किसी भी कार्यक्रम में अपने विरोधी व्यक्तियों को नहीं बुलाती, जो उनसे तर्कपूर्ण सवाल जवाब कर सकें। धर्म देखकर पत्रकारिता वाले इन पत्रकारों का उद्देश्य पत्रकारिता करना नहीं, बल्कि मुस्लिमों को लामबंद करना है।

आरफा खानम सरीखे पत्रकारों ने कई मौकों पर समाज को बांटने की हर कोशिश की है। कठुआ का मामला हो यो भीमा कोरेगांव हिंसा, इन लोगों ने पूरे हिंदू समाज को अपमान करने और हिंदुओं में फूट डालने का अभियान चलाया और इसके लिए जमकर फेक न्यूज भी प्रसारित किया।

पिछले महीने की 6 तारीख को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फैजाबाद जिले और मंडल का नाम बदलकर अयोध्या कर दिया। इसके पीछे आदित्यनाथ ने यह तर्क दिया कि यह नगर पूरे विश्व में राम के नाम से प्रसिद्ध है। अयोध्या को लोग पूरी दुनिया में जानते हैं, इसलिए इस जिले का नाम अब से फैजाबाद नहीं, अयोध्या होगा। योगी के इस फैसले पर देश के तमाम वामपंथी नस्ल के लोगों ने आपत्तियां दर्ज करनी शूरू कर दीं। इसी क्रम में धर्म आधारित और हिंदू एवं देश विरोधी पत्रकारिता करने वाली आरफा खानम शेरवानी को मिर्ची लग गयी और उन्होंने तूरंत ट्वीट करके मुख्यमंत्री योगी पर निशाना साधते हुए लिखा, “उमराव जान का फ़ैज़ाबाद अब अयोध्या कहलाया जायेगा…।”

हालांकि, आरफा, रोहित सरदना को अपशब्द बोल कर बुरी तरह फंस गई और ट्विटर पर ट्रोल होने लगीं। राज आनंद ने लिखा, “रोहित सरदाना कितनी भी कोशिश क्यों ना कर लें घटिया और “गटर स्तर” की पत्रकारिता केवल
आपके न्यूज़ पोर्टल के पत्रकार ही कर सकते हैं।”

राजेश पराशर ने लिखा, “मैडम आप अपने स्तर का मियां की जगह काफिर पढ़ लो समस्या खत्म।”

भारती अरुण ने लिखा, “और कुछ “शेरवानी” टाइप पत्रकारों को पता नही चलता कि दर्शक कौन है और ट्रोल कौन है और बात कैसी की जाती है। क्या करे, चमचागिरी की आदत जो पड़ी है।”

 

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