बहुचर्चित कठुआ कांड के सातों आरोपी साबित हो सकते हैं बेकसूर, 10 दिनों में सुनाया जा सकता है फैसला

बहुचर्चित कठुआ सामूहिक दुष्कर्म व हत्या मामले में ट्रायल पूरा हो चुका है। बचाव पक्ष ने सातों आरोपियों को बेकसूर बताया है। बताया जा रहा है कि अगले दस दिनों में केस का फैसला सुनाया जा सकता है। केस की सुनवाई इन दिनों पंजाब के पठानकोट की अदालत में चल रही है। पीड़ित परिवार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला कठुआ अदालत से पठानकोट स्थानांतरित किया था।

बुधवार (29 मई) को हुई सुनवाई में बचाव पक्ष के वकीलों ने जांच करने वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की जांच पर सवाल उठाए हैं। बुधवार को दोपहर एक बजे शुरू हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील एके साहनी और मोहित वर्मा ने बहस शुरू की। जानकारी देते हुए डिफेंस काउंसिल के वकील मास्टर मोहन लाल ने कोर्ट से बाहर निकलकर कहा कि एसआईटी और अभियोजन ने जो थ्योरी बनाई है, उसमें कोई दम नजर नहीं आ रहा।

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जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि एसएचओ ने पीड़िता के कपड़े धोए, लेकिन पूरे मामले का एक भी चश्मदीद गवाह अभियोजन पक्ष सामने नहीं ला पाया। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि एसआईटी अभी तक घटना के असली मुजरिमों तक नहीं पहुंच पाई है।

चाहे सभी आरोपी छूट जाएं, लेकिन किसी भी बेकसूर को सजा न मिले

मास्टर मोहल लाल ने कहा कि बच्ची से दुष्कर्म के बाद उसका कत्ल किया गया, जिस पर हमें भी अफसोस है, लेकिन एसआईटी की निष्पक्ष जांच सवालों के घेरे में है। हमारी मंशा है कि चाहे सातों आरोपी छूट जाएं लेकिन एक भी बेकसूर को सजा नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आगे कानून अपना काम करेगा। उन्होंने संभावना जताई कि 10 दिनों के भीतर मामले का फैसला सुनाया जा सकता है।

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अमर उजाला के अनुसार, बचाव पक्ष के वकील एके साहनी ने सरकारी वकील के साथ अपनी बहस शुरू की। करीब तीन घंटे अभियोजन पक्ष तथा बचाव पक्ष के बीच चली इस बहस के बाद आगामी सुनवाई को टाल दिया गया। वहीं दूसरी तरफ एसपीओ सुरेंद्र कुमार के वकील मोहित वर्मा ने भी उनके बचाव में बहस की।

बता दें कि जम्मू के कठुआ में 10 जनवरी 2018 को 8 साल की बच्ची लापता हो गई थी। 7 दिनों बाद उसकी लाश क्षत-विक्षत हालत में मिली। मामले में सात लोगों को आरोपी बनाया गया, जिसमे मंदिर का संरक्षक सांझी राम, उसका बेटा विशाल और नाबालिग भतीजा, एसपीओ सुरेन्द्र कुमार, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया, सब इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, सांझी राम, हेड कांस्टेबल तिलक राज और प्रवेश कुमार शामिल हैं।

बच्ची बकरवाल मुस्लिम समुदाय से थी। उस बकरवाल समुदाय से, जो कठुआ में अल्पसंख्यक है। 10 जनवरी को जब बच्ची घोड़े चराने के लिए आसपास के जंगलों में निकली, तो घर नहीं लौट पाई। बच्ची के पिता ने 12 जनवरी को हीरानगर थाने में शिकायत दर्ज कराई और 17 जनवरी को जंगल में बच्ची की लाश मिली।

उसके बाद जांच पड़ताल करके आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के खिलाफ क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट 10 अप्रैल को दाखिल की। इन दिनों केस की सुनवाई पंजाब के पठानकोट में चल रही है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तेजविंदर सिंह इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।

कोर्ट ने 8 जून 2018 को सात आरोपियों के खिलाफ बलात्कार और हत्या के आरोप तय किए थे। केस में कुल 221 गवाह बनाए गए हैं। 55वें गवाह के रूप में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर पेश हुए। 56वें गवाह के रूप में फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के एक्सपर्ट को पेश किया गया।

गौरतलब है कि इस घटना के बाद पूरे देश सांप्रदायिक माहौल बनाया गया था और लिए लिबरल जमात द्वारा हाथों में तख्ती लेकर हिंदुस्तान, हिंदुओं और मंदिर को बदनाम किया एवं देवी देवताओं एवं उनके शस्त्रों के आपत्तिजनक चित्र बनाए गए। इस केस में आरोपियों के निर्दोष साबित होने के बाद उन सभी लिबरल्स के मुंह पर करारा तमाचा होगा, जिन्होंने इसकी आड़ में हिंदू धर्म और देवीस्थान को बदनाम किया था।

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